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तेरा क्या करू ऐ जिंदगी

हमने ख्वाब देखा था, हमें दिलदार बनना था! लोग आते रहे,लोग जाते रहे, जिंदगी ने पहरेदार बना दिया। मोहब्बत हुई थी हमें, बसना था उनके दिल में बा उम्र। पर ख़ला ये है के ज़िंदगी ने, किरायेदार बना दिया।

सिर्फ मेरे हिस्से में नहीं।

तू वक्त सी है, बदलती रहती है। मेरा यह इंतजार करने का आदत जो है, बदलता नहीं। कोशिश सी थी तू, खुश रहने की। तेरे बाद अब कोई और दुख, मुझे खलता नही। इंतजार था मुझे उस रात का, उस चांद का। पर आसमान से यह सूरज, ढलता नहीं। तुझे सपनो में पाया, सुनाया किस्सो में। तू है हर जगह सिर्फ नहीं, मेरे हिस्से में।