सिर्फ मेरे हिस्से में नहीं।

तू वक्त सी है,
बदलती रहती है।
मेरा यह इंतजार करने का आदत जो है,
बदलता नहीं।

कोशिश सी थी तू,
खुश रहने की।
तेरे बाद अब कोई और दुख,
मुझे खलता नही।

इंतजार था मुझे उस रात का,
उस चांद का।
पर आसमान से यह सूरज,
ढलता नहीं।

तुझे सपनो में पाया,
सुनाया किस्सो में।
तू है हर जगह सिर्फ नहीं,
मेरे हिस्से में।

Comments

Popular posts from this blog

बटवारा