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तेरा क्या करू ऐ जिंदगी

हमने ख्वाब देखा था, हमें दिलदार बनना था! लोग आते रहे,लोग जाते रहे, जिंदगी ने पहरेदार बना दिया। मोहब्बत हुई थी हमें, बसना था उनके दिल में बा उम्र। पर ख़ला ये है के ज़िंदगी ने, किरायेदार बना दिया।

सिर्फ मेरे हिस्से में नहीं।

तू वक्त सी है, बदलती रहती है। मेरा यह इंतजार करने का आदत जो है, बदलता नहीं। कोशिश सी थी तू, खुश रहने की। तेरे बाद अब कोई और दुख, मुझे खलता नही। इंतजार था मुझे उस रात का, उस चांद का। पर आसमान से यह सूरज, ढलता नहीं। तुझे सपनो में पाया, सुनाया किस्सो में। तू है हर जगह सिर्फ नहीं, मेरे हिस्से में।

वसीयत

जब मैं न रहूंगा, मेरे बिस्तर पे गिटार पड़ी होगी। मेरी एनके शायद खो जाएगी फिर, पर तेरी उन्हे ढूंढने की कोशिश बेवजा होगी। अलमारी में मेरे कुर्ते पड़े होंगे, उनमें मेरी खुशबू पड़ी होगी। तू होगी सब होंगे फिर भी, तुझे मेरी थोड़ी कमी होगी। मेरे कमरे में कही मेरी दैनिकी रखी होगी, हो सके तो उसे छपवा देना। अखरी पन्ने में तेरा ज़िक्र है, उसे तू फाड़ लेना। मैं कल अपनी वसीयत लिखने बैठा था, मेरी यादों को तेरे नाम लिखने बैठा था। तेरे सोहबत को मेरा इनाम लिखने बैठा था, हमारे बीच की हर कलाम लिखने बैठा था।

कुछ अटपटी सी बातें

मेरी उंगलियां कैद बालों में तेरे, चल अब जा के लट सुलझा है। दिल तो तेरा गैर सा है, फिर ये बेदिली क्यों मुझसा है? कहती है तू गैर है, पर आईने में तू दिखती है। फ़र्श-ए- नाउम्मीद पे शामियाने सी तू बिछती है। गौर से तुझे देखा आज, पर क्या देखा ये याद नहीं। जिस्म से रूह बिछड़ती है, रूह से रूहदार नहीं।

बटवारा

चलो बांट लेते है सब कुछ, कुछ तेरा कुछ मेरा। तेरे आवाज को मैं रख लूं, मेरे शब्द तू रख लेना। तेरी खिलखिलाती हसी, जब तू अपना मुंह हाथ से ढक लेती थी, और मुझे सिर्फ तेरी आंखें दिखती थी। वोह हसी मुझे चाहिए, एक डिब्बे में भर के दे जाना। डिब्बे से याद आया, तू जो मीठी गुजिया लाती थी मेरे लिए। और चुप चाप देखती थीं मुझे, के मुझे वोह अच्छी लगी या नहीं। वोह एहसास मुझे दे जा। मेरे हवाले कर तेरी खुशबू, जो तू मेरे कंबल में छोड़ जाती थी। तेरे साथ वोह रातों की नींद मुझे दे जा। मेरे हर एक सिगरेट पे तेरी वोह, मीठी डांट की भी याद आती है। तेरे लिए मैं मेरा कंधा छोड़ जाऊंगा, इस जन्म नही पर अगले में तेरा बन के आऊंगा।

Sab kehne ki batein hai

Main aa kahu tum aa jao Main na kahu tum na jao Main has du tum pass ho Main dil kahu tum le jao Akash kahu toh barso tum Sohbat kahu teri mil jaye Main kahu hawa tum behne lago Duniya baki jal jaye Main neend kahu tum sapna Main hosh kahu toh kho jaye Main lab kahu tum chum lo Main pyar kahu tumhe ho jaye

Hum

Yun gumnami mein hi yeh saal beet gaya, Hosh gum they ya hum? Jab bhi baat hui  Tumhari awaz tumhare soch tumhare hasne ki Adah ko samet k rakha hai maine. Jab ankhri baar milogi sapne mein toh inka ek guldasta rakha hai le jana. Sochne aur kehne k beech mein ek shabdo ki khai hai jisme main dhasta chala ja raha hu. Shabd toh hai par koi janib nhi. Phone ki raushni se chamakti is andhere kamre mein thaki dono ankhein aj bhi tumhara intezar karti hai