बटवारा
चलो बांट लेते है सब कुछ,
कुछ तेरा कुछ मेरा।
तेरे आवाज को मैं रख लूं,
मेरे शब्द तू रख लेना।
तेरी खिलखिलाती हसी,
जब तू अपना मुंह हाथ से ढक लेती थी,
और मुझे सिर्फ तेरी आंखें दिखती थी।
वोह हसी मुझे चाहिए,
एक डिब्बे में भर के दे जाना।
डिब्बे से याद आया,
तू जो मीठी गुजिया लाती थी मेरे लिए।
और चुप चाप देखती थीं मुझे,
के मुझे वोह अच्छी लगी या नहीं।
वोह एहसास मुझे दे जा।
मेरे हवाले कर तेरी खुशबू,
जो तू मेरे कंबल में छोड़ जाती थी।
तेरे साथ वोह रातों की नींद मुझे दे जा।
मेरे हर एक सिगरेट पे तेरी वोह,
मीठी डांट की भी याद आती है।
तेरे लिए मैं मेरा कंधा छोड़ जाऊंगा,
इस जन्म नही पर अगले में तेरा बन के आऊंगा।
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