तुम एक मिराज

मैं तुम्हे भूल गया हू,
तुम्हारी खुशबू याद नहीं मुझे।
तुम्हारा चेहरा जैसे किसी गीली चित्र पे,
पानी गिराया हो किसीने।
याद हैं तोह तुम्हारी आवाज,
मेरा नाम जो तुमने दिया था।
तुम्हे पता हैं के मुझे सफाई करने से अचरज थी।
अब नहीं है।
न तो मेरे तकिए के नीचे तुम्हारे बालों की बांधनी मिलती है,
न ही उनके ऊपर तुम्हारे टूटे बाल।
जिनमे एक दो सफेद होते थे,
मैं उन सफेद बालों को छुपा दिया करता था।
मेरे चद्दरों में तुम्हारी खुशबू नही मिलती,
शायद इसीलिए तुम्हे भूल गया हु मैं।

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